कृषि वानिकी लकड़ी आधारित

यमुनानगर में लकड़ी आधारित उद्योग

हरियाणा राज्य सामाजिक और कृषि वानिकी में अग्रणी रहा है। वन विभाग द्वारा दिये गए प्रोत्साहन से प्रभावित होकर किसानों ने सत्तर के दशक में सफेदा वृक्षारोपण को अपनाया। सफेदे के लुगदी बनाने के लिए यमुनानगर में स्थानीय पेपर मिलों की जरूरत थी। सफेदे की इमारती लकड़ी के कई उपयोग के लिए फर्नीचर उद्योगों द्वारा इसे अपनाया गया। इस प्रकार, हरियाणा राज्य में सामान्य रूप से और विशेष रूप से यमुनानगर में सफेदे के लिए बहुत अच्छी मांग थी। किसान मध्य अस्सी के दशक तक अपने सफेदे की लकड़ी के लिए बहुत अच्छा मूल्य प्राप्त कर रहे थे, बाजार में सफेदे की इमारती लकडि़यों की भरमार के कारण कीमतों में गिरावट आई। इस घटना से बड़े पैमाने पर किसानों ने अपने खेतों से सफेदे के पेड़ का उन्मूलन शुरू कर दिया और सफेदे के वृक्षारोपण का क्षेत्र केवल बेकार और खराब भूमि पर ही सीमित हो गया। फसलों के स्थान पर या फसल के साथ साथ कृषि भूमि में बढ़ते सफेदा एक लाभदायक व्यवसाय नहीं था। इसी दौरान, वेस्ट इंडिया मैच कंपनी (डब्यू आई एम सी ओ) को माचिस और मैच की छड़ें बनाने के लिए पापुलर की तरह नरम लकड़ी की जरूरत पड़ी। उत्तरी हरियाणा, पश्चिम उत्तर प्रदेश और पंजाब की जलवायु और मिट्टी पोपुलर के तेजी से विकास के लिए उपयुक्त थी। व्यापक नहर सिंचाई भी पोपुलर के अत्यधिक पानी की आवश्यकता की पूर्ति में मददगार साबित हुई। गहन नहर सिंचाई प्रणाली के कारण, इस क्षेत्र में जल स्तर बहुत अधिक है जो इस क्षेत्र में पोपुलर के विकास में सुविधा प्रदान करता है। अपनी मांग को पूरा करने के लिए, विमको ने राज्य में किसानों को पापुलर से अवगत कराया और उन्हें पापुलर उगाने के लिए प्रोत्साहित किया।

अपने सफेदे की लकड़ी के लिए बहुत अच्छा मूल्य प्राप्त कर रहे थे, बाजार में सफेदे की इमारती लकडि़यों की भरमार के कारण कीमतों में गिरावट आई। इस घटना से बड़े पैमाने पर किसानों ने अपने खेतों से सफेदे के पेड़ का उन्मूलन शुरू कर दिया और सफेदे के वृक्षारोपण का क्षेत्र केवल बेकार और खराब भूमि पर ही सीमित हो गया। फसलों के स्थान पर या फसल के साथ साथ कृषि भूमि में बढ़ते सफेदा एक लाभदायक व्यवसाय नहीं था। इसी दौरान, वेस्ट इंडिया मैच कंपनी (डब्यूबढ़ आई एम सी ओ) को माचिस और मैच की छड़ें बनाने के लिए पोपुलर की तरह नरम लकड़ी की जरूरत पड़ी। उत्तरी हरियाणा, पश्चिम उत्तर प्रदेश और पंजाब की जलवायु और मिट्टी पोपुलर के तेजी से विकास के लिए उपयुक्त थी। व्यापक नहर सिंचाई भी पोपुलर के अत्य धिक पानी की आवश्यसकता की पूर्ति में मददगार साबित हुई। गहन नहर सिंचाई प्रणाली के कारण, इस क्षेत्र में जल स्तर बहुत अधिक है जो इस क्षेत्र में पोपुलर के विकास में सुविधा प्रदान करता है। अपनी मांग को पूरा करने के लिए, विमको ने राज्य में किसानों को पापुलर से अवगत कराया और उन्हे पोपुलर उगाने के लिए प्रोत्साहित किया।

पापुलर कृषि वानिकी के लिए एक बहुत अच्छी प्रजाति रही है तथा इस क्षेत्र के बड़े और छोटे दोनों किसानों द्वारा अपनाया गया था। गेहूं, जो कि मुख्य रबी फसल है आसानी से पापुलर वृक्षारोपण के साथ खेती की जा सकती है क्योकि पापुलर सर्दियों के दौरान बिना पत्तों का हो जाता है इस प्रकार कृषि फसल के लिए सूर्य का प्रकाश अधिक प्राप्तय होता है। इस प्रकार की कृषि से किसानों को गेहूं से सालाना लाभ मिलता है, और इमारती लकड़ी तथा ईंधन के संदर्भ में रोटेशन के अंत में (7 से 10 साल) एकमुश्तक लाभ मिलता है। हालांकि, पोपुलर गेहूं का उत्पादन कम कर देता है (17-18 क्वि./एकड़ के स्थान पर 15 क्वि./एकड़) लेकिन लकड़ी के उत्पादन का लाभ अनाज उत्पादन में नुकसान की तुलना में कहीं अधिक था।

किसानों ने अपने खेतों में पापुलर लगाना शुरू कर दिया, क्षेत्र में उत्पादित इमारती लकड़ी बहुत थी जिसकी प्राकृतिक जंगल में कमी है। इसने यमुनानगर और जगाधरी के दोनों शहर में प्लाईवुड और प्लाईबोर्ड विनिर्माण इकाई स्थापित करने के लिए यमुनानगर के कई उद्यमी उद्योगपतियों को प्रोत्साहित किया। पोपुलर बेहतर प्लाईबोर्ड निर्माण के लिए उपयुक्त था क्योंकि यह नरम और हल्की़ होती है। इस प्रकार कुल उत्पादन का 70% प्लाईबोर्ड के होते हैं जबकि 30% प्लाईवुड के होते हैं। यमुनानगर जिले में लगभग 273 प्लाईवुड विनिर्माण इकाइयां, 297 छीलन इकाइयां और 331 चीर मिल हैं। एक अनुमान के अनुसार यमुनानगर बाजार में इमारती लकड़ी से लगभग 3 करोड़ रूपये दैनिक आमद है, तथा लकड़ी के उत्पादनों से लगभग 9 करोड़ रूपये। यमुनानगर में औद्योगिक विकास का एक बहुत उल्लेखनीय पहलू सम्बद्ध या सहायक इकाइयों के विकास का था जिससे बाह्य उत्पादों का कुशल तरीके से उपयोग किया गया। छील इकाई और चीर मिल, अब एक ही जगह पर आ गये हैं, टुकड़ों को लुगदी गठन के लिए स्थानीय पेपर मिल को बेच दिया जाता है, छीलन मिल का धूल भट्टों और पोल्ट्री फार्म को, छाल ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, इस प्रकार लकड़ी के हर टुकड़े का उपयोग किया जाता है।

स्थानीय मांग के कारण, किसानों को पोपुलर के लिए आकर्षक कीमत और इमारती लकड़ी के उत्पादन से अच्छी आय मिली, जो कृषि फसलों में नुकसान से बहुत अधिक थी। शुरुआत में जिन किसानों ने पापुलर खेती को अपनाया, वे बहुत अमीर बन गये और पापुलर फसल की पहली रोटेशन के अंत में आधुनिक कृषि उपकरणों को भी खरीद लिया। इससे भूमि की उत्पादकता में वृद्धि हुई है। यह क्रम मध्य नब्बे के दशक तक जारी रहा, लेकिन उसके बाद पापुलर की कीमतों में गिरावट आई। पोपुलर की कीमतों के पतन के लिए चार मुख्य कारण हैं। सबसे पहले, अर्थव्यवस्था में दुनिया भर में मंदी के कारण प्लाईवुड और बोर्ड की मांग में कमी आई, लेकिन उद्योग का उत्पादन स्तर पहले जैसा ही था, इस प्रकार इन तैयार उत्पादों के बाजार मूल्य में गिरावट आना ही था। दूसरे, भारत सरकार ने इमारती लकड़ी को ओजीएल सूची में डाल दिया, जिससे इमारती लकड़ी और लुगदी के सस्ते आयात में मदद मिली। तीसरा, न्यूजीलैंड पाइन, कांडला पोर्ट पर बहुत सस्ते दर पर उपलब्ध था जो ब्लॉक के रूप में ब्लॉकवुड उत्पादन में इस्तेमाल किया गया था। यमुनानगर से प्लाईवुड और ब्लॉ्कवुड पूरे भारत में आपूर्ति की जा रही थी लेकिन मुख्य बाजार गुजरात और महाराष्ट्र में है। इस प्रकार गुजरात के ब्लॉकवुड उत्पादकों ने यमुनानगर के उत्पादकों पर एक बढ़त हासिल कर ली। न्यूजीलैंड पाइन एक कृषि वानिकी फसल है और रूपांतरण के बाद तख्ते, रद्दी सामग्री बनाने के लिए इस्तेमाल होता है, जिसका बहुत सस्ते दर पर भारत को निर्यात किया जाता है। चौथे, स्थानीय बाजार में मांग और आपूर्ति में असंतुलन हो गया था, पापुलर के खरीदारों के पक्ष में मांग से अधिक आपूर्ति है। सस्ती पोपुलर की लकड़ी जम्मू एवं कश्मीर से भी आ रही थी।

ब्लॉक लकड़ी की कीमतों में गिरावट के कारण (@रू.9 प्रति वर्ग फुट से @रू.4 प्रति वर्ग फुट) यह समस्या और भी अधिक बढ़ जाती है, यमुनानगर में उद्योग ब्लॉ्कवुड उत्पादन से प्लाईवुड उत्पादन में बदल रहे हैं। पापुलर पत्तर के लिए सबसे अच्छा विकल्प नहीं होने के कारण सफेदा के लिए रास्ता खोल देती है जो अधिक टिकाऊ, कड़ा और पापुलर पत्तेर से भारी है। यहां तक कि अगर पापुलर पत्तर प्लाईवुड निर्माण के लिए इस्तेमाल किये जाते हैं तो यह अच्छी गुणवत्ता का होना चाहिए, अर्थात पर्याप्त मोटाई के साथ सीधा बिल्कुयल साफ तना। चूँकि पापुलर वह प्रजाति है जो सफेदा की तुलना में स्वतत: छंटनी में समर्थ नहीं है, यह एक सामान्य किसान के लिए बहुत मुश्किल हो जाता है जिसके पास पापुलर के पैदावार तथा ठीक से पोपुलर के पेड़ की छँटाई करने के लिए बहुत कम तकनीकी ज्ञान है।

पोपुलर की लकड़ी की कीमतों में 1995-2003 के दौरान एक गिरावट देखी गई। प्रगतिशील बड़े किसान जो जोखिम ले सकते हैं वे कम मात्रा में इसकी खेती करते रहे हैं। पोपुलर खेती का विकास कम हो गया, जिसने अंतत: उत्तरी भारत में पापुलर की लकड़ी का उत्पादन कम कर दिया। बाजार की यह सुधारात्मक कार्रवाई पापुलर लकड़ी की कीमतों को स्थिर करने में मदद की। पोपुलर की कीमतों में इस सामान्य गिरावट के अलावा एक छोटा मौसमी बदलाव भी है जो किसानों की दृष्टि से महत्वपूर्ण हो जाता है। 15 दिसंबर से 15 मार्च के बीच श्रमिकों की कम उपलब्धता के कारण, कीमतें आम तौर पर कम हो जाती हैं। निष्क्रिय अवधि अर्थात सर्दियों के दौरान इमारती लकड़ी के वजन में सूक्ष्म भिन्नता भी है, वजन गर्मियों की तुलना में 5% अधिक होता है।

इसी तरह एक ही दिन के भीतर, सुबह में दर, शाम की तुलना में अधिक होता है। यहॉं, यह उल्लेरखनीय है कि, यमुनानगर जिले के वर्तमान वन और ट्री कवर 24.6% हैं, जबकि वनभूमि, कुल भौगोलिक क्षेत्र का सिर्फ 12.1% है।