सूचना का अधिकार अधिनियम, 28 अक्टूबर, 2005 दिनांकित

हरियाणा सरकार प्रशासनिक सुधार विभाग अधिसूचना 28 अक्टूबर 2005

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (केन्द्रीय अधिनियम 2005 का 22) की धारा 27 की उप धारा (2) के साथ पठित उपधारा (I) नंबर 05/04/2002 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए हरियाणा के राज्यपाल एतद्द्वारा जानकारी देने हेतु उपरोक्तं अधिनियम के तहत निम्नलिखित नियम बनाते हैं-

(च) राज्य लोक सूचना अधिकारी से हलफनामों पर प्राप्त सबूत या कोई भी वरिष्ठ अधिकारी जिसने प्रथम अपील का फैसला किया था, या कोई भी अन्य व्यक्ति जिनसे सबूत जरूरी समझा जा सकता है।

  1. संक्षिप्त नाम और प्रारम्भ
    1. इन नियमों को हरियाणा सूचना का अधिकार नियम, 2005 कहा जा सकता है।
    2. ये राजपत्र में प्रकाशन की तारीख को प्रवृत्त होंगे।
  2. परिभाषाएं
    1. इन नियमों में संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित है,
      (क) "अधिनियम" अर्थात सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (2005 का केन्द्रीय अधिनियम 22)
      (ख) "आयोग" अर्थात हरियाणा सूचना आयोग।
      (ग) "फार्म" अर्थात इन नियमों में संलग्न एक प्रारूप।
      (घ) "धारा" अर्थात अधिनियम की धारा।
    2. ऐसे शब्द और भाव जिनको इन नियमों में प्रयोग किया जाता है, लेकिन परिभाषित नहीं किया जाता, उनका अर्थ अधिनियम के अनुसार होगा।
  3. सूचना प्राप्त करने के लिए आवेदन
    1. कोई भी व्यक्ति जो अधिनियम के तहत कोई सूचना प्राप्त करना चाहता है, उसको फार्म अ में आवेदन बनाकर, इन नियमों में निर्दिष्ट नियम 5, धारा 2 (एम), 6 और 27 के अनुसार शुल्क के साथ राज्य लोक सूचना अधिकारी / राज्य सहायक लोक सूचना अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।
    2. उपनियम (1) के तहत किए गए आवेदन के प्राप्त होने पर राज्य लोक सूचना अधिकारी / राज्य सहायक लोक सूचना अधिकारी आवेदक को उसके टोकन में एक रसीद देंगे।
  4. शुल्क जमा करना
    1. शुल्क नकद रूप से समुचित रसीद के साथ राज्य लोक सूचना अधिकारी / राज्य सहायक लोक सूचना अधिकारी के समक्ष या राजकोष चालान द्वारा जमा करना होगा।
    2. शुल्क की राशि को संबंधित लोक प्राधिकारी के मद / खाता नंबर में जमा किया जाएगा।
    3. नियम 3 के उपनियम (1) के तहत प्रस्तुत आवेदन प्राप्त होने पर राज्य लोक सूचना अधिकारी / राज्य सहायक लोक सूचना अधिकारी आवेदन पत्रों की जांच करेगा और आवेदक द्वारा अपेक्षित जानकारी के लिए आवश्यक शुल्क का आकलन करेगा।
    4. उपनियम (3) के तहत मूल्यांकित शुल्क, आवेदन प्राप्ति के सात दिन की अवधि के भीतर फार्म बी में राज्य लोक सूचना अधिकारी / राज्य सहायक लोक सूचना अधिकारी के द्वारा आवेदक को सूचित किया जाएगा।
    5. यदि आवेदक, उपनियम (4) के तहत उसे दी गई सूचना के जारी करने के बाद पंद्रह दिन की अवधि के भीतर अपेक्षित शुल्क जमा करने में विफल रहता है तो आवेदक की अब कोई जानकारी प्राप्त करने में रुचि नहीं है, यह अर्थ लगाया जाएगा।
  5. शुल्क की मात्रा
    1. धारा 6 की उपधारा (1) के तहत किसी भी जानकारी प्राप्त करने के लिए एक आवेदन के साथ साथ 50 रूपये की फीस देनी होगी।
    2. धारा 7 की उपधारा (1) के तहत जानकारी प्रदान करने के लिए, निम्न दरों पर आवेदक से शुल्क लिया जाएगा: -
      (क) प्रत्येक A4 आकार के पेज (नकल या तैयार) के लिए 10 रूपये
      (ख) यदि जानकारी A4 से बड़े पेज में उपलब्ध कराई जाती है तो पेपर की वास्तविक मूल्य वसूल की जायेगी।
    3. धारा 7 की उपधारा (5) के तहत जानकारी प्रदान करने के लिए, निम्न दरों पर आवेदक से शुल्क लिया जाएगा: -
      (क) फ्लॉपी में जानकारी देने के लिए 50 रुपये।
      (ख) डिस्क में जानकारी देने के लिए 100 रुपये।
      (ग)यदि मांगी गई जानकारी में कोई मुद्रित दस्तावेज शामिल है जिसका एक मूल्य निर्धारित किया गया है तो निर्धारित मूल्य वसूलने के बाद ही जानकारी प्रदान की जायेगी। हालांकि, अगर इस तरह के मुद्रित दस्तावेज़ का एक उद्धरण मांगा जाता है, तो प्रति पृष्ठ 10 रुपये वसूल किया जाएगा।
    4. यदि निरीक्षण एक घंटे के लिए ही किया जाता है तो इस तरह के रिकार्ड निरीक्षण के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। हालांकि, यदि निरीक्षण एक घंटे से अधिक की अवधि के लिए किया जाता है तो पहले घंटे से अधिक में हर पंद्रह मिनट के लिए दस रूपये का शुल्क लिया जाएगा। उक्त पंद्रह मिनट अवधि के हर अंश को पंद्रह मिनट की पूरी अवधि के रूप में माना जाएगा और यह पंद्रह मिनट की पूर्ण अवधि के रूप में वसूल किया जाएगा।
  6. अपील पर निर्णय लेने में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया
    एक अपील निश्चित करने से पहले, आयोग करेगा
    (क) संबंधित व्यक्तियों को नोटिस की सेवा।
    (ख) अपील के समर्थन में कोई सबूत पर विचार करना, जो संबंधित व्यक्तियों से मौखिक या लिखित रूप में हो सकता है।
    (ग) संबंधित व्यक्तियों से प्राप्त हलफनामा या शपथ पत्र का निरीक्षण करना।
    (घ) उसके दस्तावेजों या कोई रिकॉर्ड या प्रतियों पर विचार करना या निरीक्षण करना।
    (ङ) प्राधिकृत अधिकारी के माध्यम से अपील के तथ्यों की पूछताछ या उचित समझे जाने पर, राज्य लोक सूचना अधिकारी या कोई अन्य वरिष्ठ अधिकारी जिसने पहली अपील का फैसला किया था, की सुनवाई के लिए विस्तार से तथ्यों की आवश्यकता हो सकती है।
  7. नोटिस देने का तरीका
    आयोग, निम्न विधियों में से किसी में संबंधित व्यक्तियों को नोटिस दे सकता है, अर्थात:-
    (क) प्रोसेस सर्वर के माध्यम से हाथ वितरण (दस्ती) के द्वारा, या
    (ख) रसीद के साथ रजिस्टर्ड डाक द्वारा, या
    (ग) समाचार पत्र में प्रकाशन द्वारा।
  8. आयोग द्वारा आदेश
    1. आयोग लिखित में आदेश देगा तथा संबंधित पक्षों की उपस्थिति में ही अपना मत व्यक्त करेगा।
    2. (2) संबंधित पक्ष आयोग से आदेश की प्रति प्राप्त करने के लिए विचार कर सकते हैं।