वनीकरण

        हरियाणा मुख्य रूप से एक कृषि प्रधान राज्य है। इसकी लगभग 80% भौगोलिक भूमि में कृषि कार्य किया जाता है जबकि भौगोलिक भूमि का 16% अन्य उपयोगों जैसे बस्ती, सड़क, रेलवे, संस्थानों, नहरों आदि के लिए प्रयोग की जाती है। क्षेत्र का अधिकांश भाग कृषि और अन्य बुनियादी ढांचे के लिए है, अधिसूचित वन क्षेत्र लगभग केवल 3.90% है और भूमि अधिग्रहण और अन्य साधनों के माध्यम से अधिसूचित वन क्षेत्र को बढ़ाने की गुंजाइश कम ही है। वन और वृक्ष आच्छादन को बढ़ाने के लिए, वन विभाग ने वृक्ष आच्छादन के अंतर्गत अधिक से अधिक क्षेत्र को लाने के लिए अन्य सरकारी भूमि, संस्थागत भूमि, पंचायत भूमि, आम भूमि और अन्य बंजर भूमि पर बड़े पैमाने पर वनीकरण कार्यक्रम शुरू किए हैं। वन विभाग वार्षिक आधार पर औसत रूप से 20,000 हेक्टेयर क्षेत्र में वृक्षारोपण का कार्यक्रम चलाता है। लगभग 60% पौधरोपण सरकारी वन क्षेत्रों के बाहर किया जाता है। 2012-2013 तक, किसानों, अन्य सरकारी विभागों, संस्थाओं, स्कूलों, ग्राम पंचायतों आदि को उनकी भूमि पर वृक्षारोपण के लिए पौधे वितरित किए जाते रहे हैं। सामुदायिक भूमि, पंचायत भूमि, संस्थागत भूमि, निजी कृषि भूमि आदि के साथ ही किसानों द्वारा कृषि वानिकी स्वीकारने अर्थात गैर वन भूमि पर वन विभाग द्वारा शुरू किए गए बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण के कारण, भारतीय वन सर्वेक्षण देहरादून के द्वारा प्रकाशित राज्य वन रिपोर्ट 2011 के अनुसार राज्य का वन एवं वृक्ष आच्छादन क्षेत्र 6.80% बढ़ गया है। हरियाणा वन विभाग ने एक चरणबद्ध तरीके से 20% वन और वृक्ष आच्छादन प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह लक्ष्य तभी प्राप्त किया जा सकता है जब अधिसूचित वन क्षेत्रों के बाहर की भूमि में कृषि वानिकी और वनीकरण पर मुख्य् जोर दिया जायेगा।






अंतिम नवीनीकृत:  27/6/2013