नागरिक अधिकार पत्र


परिचय

        हरियाणा मुख्य रूप से एक कृषि प्रधान राज्य है तथा इसकी लगभग 80% भूमि पर खेती की जाती है। राज्य का भौगोलिक क्षेत्र 44212 वर्ग किलोमीटर है जो भारत के भौगोलिक क्षेत्र का 1.3% है। यह राज्य प्राकृतिक वनों से आच्छाकदित नहीं है तथा भौगोलिक क्षेत्र का केवल 3.64% अधिसूचित वनों के अधीन है। बाकी वन क्षेत्र गांव की सामान्य भूमि,सामुदायिकी भूमि, संस्थागत भूमि और कृषि फार्मों में वन आच्छादन के रूप में फैली हुई है, कुल वन क्षेत्र और वन आच्छादन 6.80 प्रतिशत है। (इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्टं रिपोर्ट, एफएसआई, 2011) राज्य में वानिकी गतिविधियां उत्तर में बीहड़ शिवालिक पहाडि़यों, दक्षिण में अरावली पहाड़ियों, पश्चिम में बंजर भूमि और बलुआ स्थानों, राज्य के मध्य भाग में खारा क्षारीय भूमि और जलग्रस्तय स्थानों में फैले हुए हैं।


        राज्य में वन संसाधनों के सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा सरकार ने 2006 में अपनी खुद की वन नीति बनाई है। नीति के तहत राज्य में चरणबद्ध तरीके से 20% वन और वन आच्छादन को प्राप्त करने का लक्ष्य तय किया गया है। इस लक्ष्य को कृषि वानिकी गतिविधियों के द्वारा प्राप्त किया जा सकता है। उत्पादकता बढ़ाने के लिए कृषि भूमि पर आनुवंशिक रूप से बेहतर पौध का उपयोग कृषि वानिकी के तहत किया जा रहा है। वास्तव में कृषि वानिकी को राष्ट्रीय जनादेश और जन आंदोलन बन जाना चाहिए क्यों कि यह देश की पारिस्थितिकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सबसे किफायती, टिकाऊ और स्थिर विकल्प है। पूर्व में वन विभाग किसानों को प्रतिवर्ष लगभग 2.5 करोड़ पौध नि: शुल्क वितरण करता रहा है। वन विभाग द्वारा उठाए गए कृषि वानिकी वृक्षारोपण को देश में सर्वश्रेष्ठ कार्य के रूप में मूल्यांकन किया जा रहा है। यह एक आय अर्जन गतिविधि के रूप में किसानों द्वारा अपनाई गई है और देश के बाकी हिस्सों में इसे अनुकरण के योग्य, ग्रामीण विकास के एक मॉडल के रूप में इस्तेमाल किया गया है। यह प्रक्रिया वन आच्छादन के तहत राष्ट्रीय वन नीति में विहित की गई देश के भौगोलिक क्षेत्र का एक तिहाई क्षेत्र वन क्षेत्र के रूप मे प्राप्त करने के लक्ष्य को पूरा कर सकती है। हरियाणा में कृषि वानिकी की सफलता, एक जंगल अभाव राज्य को प्लाईवुड और पत्तीर विनिर्माण के मामले में सबसे अधिक उत्पादक राज्य बनाने में सक्षम है। ज्यादातर खेतों में विकसित लकड़ी को सलाना 2.5 करोड़ घन मीटर, हरियाणा राज्य के भीतर सम्मिश्र लकड़ी के प्लाईवुड और अन्य रूपों में बदल दी जाती है। आज, यमुनानगर प्लाईवुड और कागज उद्योग का राष्ट्रीय केन्द्र बन गया है। निजी भूमि से पेड़ों की कटाई पर अनावश्यक प्रतिबंध नहीं लगाने की नीति और उनके पारगमन से एक ऐसा माहौल पैदा हुआ है जिसने किसानों की एक बड़ी संख्या को पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहहित किया है। राज्य के प्रयास से एक ऐसा माहौल बना है जो कृषि वानिकी और लकड़ी आधारित उद्योगों को एक साथ पनपने और विकसित करने में सक्षम बनाता है।


प्रस्तावना

        हरियाणा एक कृषि प्रधान राज्य है। हरियाणा वन एवं वन्य जीव संरक्षण विभाग, हरियाणा राज्य वन नीति के अनुसार वन / वन आच्छादन को बढ़ाने के लिए प्रयास कर रहा है। इसके साथ ही, पारिस्थितिकी गिरावट को रोकने के लिए मौजूदा प्रजातियों के पेड़ और जीवों की रक्षा और संरक्षण के उपाय भी किये जा रहे हैं।


उद्देश्य

        इस चार्टर का उद्देश्य जनता की सेवा में बेहतर गुणवत्ता के लिए काम करना है


        विभाग द्वारा निम्नलिखित सेवाएं दी जा रही हैं: -


(क) वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत भारत सरकार से अनुमति प्राप्त करने के लिए परियोजना फ़ाइलों का प्रसंस्करण।
(ख) पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम 1900 की धारा 4 के तहत क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई के लिए अनुमति देना।
(ग) पौध वितरण।
(घ) चिड़ियाघरों में सेवा।


        गुणवत्ता युक्त प्रजातियों के वृक्षों के रोपण और वन और वन्य जीवों के संरक्षण के अलावा, विभाग वन क्षेत्रों का वैज्ञानिक प्रबंधन करता है जो वनों की उत्पादकता बढ़ाने, पहाड़ी क्षेत्रों में मिट्टी के कटाव की जांच और भूजल पुनर्भरण में सुधार के लिए मदद करता है। हाल ही में हर्बल संरक्षण क्षेत्रों / भूखंड के विकास की एक नई अवधारणा, स्थानीय लोगों के बीच पारंपरिक औषधीय पौधों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए शुरू की गई है।
        विभाग आर्थिक महत्व की प्रजातियों के वृक्षों के वृक्षारोपण के लिए तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करके किसानों को उनकी कृषि भूमि पर कृषि वानिकी के लिए प्रोत्साहित करती है। साथ-साथ वन विभाग, बाजार में उपलब्ध प्रजातियों के पेड़ों के नकली संस्करण के वृक्षारोपण के खिलाफ किसानों को चेतावनी देता है। विभाग वन नर्सरी से विशेष रूप से किसानों में और सामान्य रूप से जनता में पौधों की आपूर्ति भी करता है।
        टिंबर / बँटवारा नियम 2000 के हरियाणा राज्य के नियम के तहत, एक लाभ बंटवारा तंत्र किसानों के लिए तैयार किया गया है जो रोड पट्टी वन से सटे हुए उनकी कृषि योग्य भूमि के मालिक हैं। इस तंत्र के माध्यम से किसानों को चोरी, अवैध कटाई, चराई या आग से इन पेड़ों की सुरक्षा के लिए किसानों द्वारा प्रदान की गई सेवाओं के एवज में रोड पट्टी वन के पेड़ों से राजस्व / शेयर का उचित अनुपात में मिलता है।
सेवाओं के वितरण के लिए समय सीमा
क्रम संख्या सेवा का नाम/प्रकार सेवा देने का वर्तमान साधन (मैनुअल/ इलेक्ट्रॉनिक) सेवा के लिए निर्धारित समय सीमा यदि कोई हो सेवा, यदि कोई हो,
1 वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत भारत सरकार से अनुमति प्राप्त करने के लिए परियोजना फ़ाइलों का प्रसंस्करण। मैनुअल भारत सरकार द्वारा तय समय सीमा के अंतर्गत: -
क) वन मण्डल अधिकारी कार्यालय से प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्या. – 90 दिन
ख) प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्या. से राज्य सरकार – 30 दिन
ग) राज्य् सरकार से भारत सर कार (क्षेत्रीय कार्यालय) – 60 दिन
2 पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम 1900 की धारा 4 के तहत क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई के लिए अनुमति देना
क) अनुमोदित कटाई कार्यक्रम के तहत सामान्य कटाई के लिए
ख) डेवियेशन के मामलों में कटाई के लिए

मैनुअल

मैनुअल

एक माह

दो माह
3 अंकुर वितरण मैनुअल 3 दिनों के भीतर
4 चिड़ियाघर के लिए प्रवेश मैनुअल उसी दिन


इन व्यक्तियों / अधिकारियों से सम्पर्क करे:

        किसी भी जानकारी के लिए विभाग के अधिकारियों को विभागीय वेबसाइट पर उपलब्ध उनके संपर्क नंबर पर संपर्क किया जा सकता है: www.haryanaforest.gov.in


        शिकायतों को निम्न पते पर विभाग के प्रमुख को सीधे भी भेजा जा सकता है: -

        प्रधान मुख्य वन संरक्षक, हरियाणा

        सी. -18, वन भवन, सेक्टर -6, पंचकूला

        फोन: 0172-2563988

        ई मेल आईडी: cfplg@yahoo.com

        नागरिक घोषणा पत्र विभागीय वेबसाइट पर भी उपलब्ध है.

एक अनुरोध

        नागरिक घोषणा पत्र विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सेवा की गुणवत्ता में सुधार के लिए विभाग और आम जनता के बीच एक संयुक्त प्रयास है, आम जनता से निम्नलिखित सहयोग की अपेक्षा है: -

        क) कुख्यात लकड़ी तस्करों के बारे में जानकारी

        ख) वन्य जीव शिकारियों के बारे में सूचना

        ग) लकड़ी और अन्य वन उपज के अवैध भंडारण के बारे में जानकारी

        घ) वन भूमि पर कब्जा करने वालों और अतिक्रमण के बारे में जानकारी

        आइए, इस नागरिक घोषणा पत्र को सफल बनाने में हाथ बटाइए


अंतिम नवीनीकृत:  20/09/2013