वन्यजीवों का संरक्षण

        यद्यपि हरियाणा में प्राकृतिक वनों की कमी है लेकिन यहां विशाल जैव विविधता है, वह इस राज्य को वन्य जीव विशेष रूप से स्थानीय और प्रवासी पक्षी प्रजातियों की विविधता के लिए उपयुक्त बनाता है। पक्षियों की लगभग 1250 प्रजातियां भारतीय उपमहाद्वीप में दर्ज की गई है, जिनमें से लगभग 500 प्रजातियों के पक्षी हरियाणा में पाए जाते हैं। यहां वन्यजीव उनके प्राकृतिक निवास में बहुत अच्छे से परिरक्षित हैं। वन विभाग की वन्य प्राणी स्कन्ध ने वन्यजीव संरक्षण के लिए दो आयामी रणनीति अपनाई है: सुरक्षा और जागरूकता फैलाना। विभाग ने निवास स्थान के संरक्षण के साथ ही अवैध शिकार के खिलाफ संरक्षण पर भी जोर दिया है। वन्यजीव संरक्षण का लक्ष्य अन्तः परिवासीय और बाह्य परिवासीय संरक्षण रणनीतियों के माध्यम से हासिल किया जा रहा है। राज्य में वन्यजीवों के यथास्थान संरक्षण के लिए उनके प्राकृतिक घर के अंदर, 2 राष्ट्रीय पार्क, 8 वन्यजीव अभयारण्य और 2 कंजर्वेशन रिजर्व स्थापित किये गये है। बाह्य परिवासीय संरक्षण प्रयासों के रूप में लाल जंगली मुर्गी का प्रजनन पिंजौर के पास किया जा रहा है। हरियाणा के शिवालिक में पाया जाने वाला लाल जंगली मुर्गा शुद्ध नस्ल का माना जाता है जो डीएनए / फिंगरप्रिंटिंग और डायग्नॉयस्टिक के लिए भी केन्द्र (सीडीएफडी), हैदराबाद द्वारा सत्यापित है। विलुप्त होने की कगार पर पहुँचे गिप्स गिद्ध प्रजातियों के संरक्षण के लिए, विभाग ने रॉयल सोसायटी फॉर प्रोटेक्शन ऑफ बर्ड्स (आरएसपीबी), ज़ूलोजिकल सोसायटी ऑफ लंदन (जेडएसएल) यूनाइटेड किंगडम तथा बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी (बीएनएचएस) के सहयोग से पिंजौर के पास जटायु (गिद्ध) संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र की स्थापना की है। विभाग ने वन्यजीव संरक्षण के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए भिवानी, रोहतक और पिपली मे लघु चिड़ियाघरो तथा हिसार में हिरण पार्क की स्थापना की है। रेवाड़ी जिले के झाबुआ रिजर्व वन में एक मयूर और चिंकारा संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र की स्थापना की गईहै।






अंतिम नवीनीकृत:  26/6/2013