प्रतीक चिन्ह
हरियाणा राज्य के प्रतीक वृक्ष, पशु एवं पक्षी एमलबस

राज्य वृक्ष - पीपल,पीपुल या बो पेड़ (पवित्र पीपल वृक्ष)  

पीपल वृक्ष (पवित्र पीपल वृक्ष) को, जो भारत का एक देशी पेड़ है, हरियाणा का राज्य वृक्ष घोषित किया गया है। जड़, छाल, पत्ते और फल सहित पीपल पेड़ के सभी भाग, उपयोगी होते हैं। पीपल वृक्ष की वनस्पति वर्गीकरण है-

श्रेणी: मैग्नोलियोफिटा कक्षा: मैग्नो्लियोप्सिडा क्रम: उर्टिकेलस फैमिली: मोरासी लैटिन नाम: फिकस रेलिजिओसा लिन

अंग्रेजी नाम: सेक्रेड फिग, द होली बिग ट्री

संस्कृत नाम: अश्वाथ

वृक्ष का विवरण: बड़े पेड़, फूल का रंग लाल, फरवरी में फूल, मई / जून में फल, व्यापक रूप से ऊपरी भूभाग और मैदानी क्षेत्र में पाया जाता है।

उपयोगी भाग: जड़, छाल, पत्ते और फल।

औषधीय उपयोग: पेड़ की छाल प्रदाह और गर्दन की ग्रंथियों में सूजन में उपयोगी है। इसके जड़ की छाल मुखशोथ, स्वच्छ अल्सर के लिए उपयोगी है, और कणिकायन को बढ़ावा देता है। इसकी जड़ें गठिया रोग के लिए उपयोगी हैं तथा जड़ को मसूढ़ों के रोगों को रोकने के लिए चबाया जाता है। इसका फल रेचक है जो पाचन और उल्टी को बढ़ावा देता है। इसके पके हुए फल का स्वाद खराब होता है किन्तु, प्यास और दिल की बीमारियों के लिए अच्छे हैं। संचालित फल अस्थमा के लिए लिया जाता है। इसके बीज, मूत्र से संबंधित समस्या ओं में उपयोगी साबित हुए हैं। पत्तियॉं कब्ज के इलाज के लिए उपयोग में लाई जाती हैं।


राज्य पुष्प - कमल

लोटस या जल लिली केवल उथले पानी में उगने वाला, बड़े तैरने वाले हरी पत्तियों वाला और चमकदार सुगंधित फूलों वाला एक जलीय पौधा है। इसके फूल को रंगों के आधार पर दो प्रकार में बांटा गया है, लाल कमल के फूल और सफेद कमल के फूल। इसके सुंदर फूल तैरने वाले तथा कई पंखुडि़यों वाले होते हैं। कमल अपनी प्रशान्त सुंदरता के कारण बेशकीमती है1 तालाब की सतह पर खिले हुए कमल के फूल को देखना आनंददायी होता है।




राज्य पशु – कृष्णमृग

कृष्णमृग, मुख्य रूप से भारत में पाया जाता है लेकिन पाकिस्तान और नेपाल में भी इसकी छोटी आबादी पायी जाती है। कृष्णमृग का चक्राकार सींग होता है जिसमें 3 से 4 मध्यम सर्पिल मोड़ होती है और इसकी लंबाई 70 सेमी (28 इंच) तक होती है। अफ्रीका के स्याह मृग को भी कृष्णमृग कहा जाता है। वयस्क नर कृष्णमृग की ऊँचाई कंधे तक 80 सेमी (32 इंच) होती है और वजन 32-43 किलोग्राम (71-95 पौंड) होता है। शरीर का ऊपरी भाग काला होता है, निचला हिस्सा तथा आंखों के आसपास एक गोल निशान का रंग सफेद होता है। हल्के भूरे रंग की हिरनियॉं प्राय: बिना सींग के होती हैं, और हिरन गहरे भूरे रंग के होते हैं।

काला हिरन जो भारतीय कृष्ण मृग (अन्तेलोपेसर्विकाप्रा) भी कहा जाता है। इसके निम्नलिखित चार उप प्रजाति हैं:

» अन्तेलोपे सर्विकाप्रा सर्विकाप्रा

» अन्तेलोपे सर्विकाप्रा राजपूताने

» अन्तेलोपे सर्विकाप्रा सन्त्रलिस

» अन्तेलोपे सर्विकाप्रा रुपिकाप्रा


राज्य पक्षी – ब्लैक फ्रैंकोलीन (काला तीतर)

ब्लैंक फ्रैंकोलीन (फ्रंकोलिनुस फ्रंकोलिनुस) काला तीतर के रूप में जाना जाता है, यह उत्तर और मध्य भारत के अधिकांश क्षेत्र में एक व्यापक प्रजनन निवासी है। हिन्दी में काला तीतर नामक यह सुंदर ठूंठ पूंछ वाला साहसी पक्षी सीमावर्ती झीलों, खेत और झाडि़यों के पास पाया जाता है। काला तीतर, फसल, घास और झाड़ियों को पसंद करते हैं, जो आश्रय प्रदान करने के लिए काफी लंबे, और जमीन पर आसानी से बचने के लिए नीचे खुले होते हैं। यह भूरे फ्रैंकलीन की अपेक्षा पानी के साथ और अधिक जुड़ा होता है।

आकार: 34 सेमी

पुरुष काले तीतर काले रंग के होते हैं, इसके गाल पर सफेद धब्बे, एक भूरा गला और पार्श्व भाग में भी सफेद धब्बे होते हैं। पीठ और पंख उप टर्मिनल गहरे पीले-शौकीन बैंड और पीले किनारों के साथ सुनहरे भूरे रंग के सीप के समान होते हैं। पूँछ संकीर्ण सफेद पट्टियों के साथ काले रंग की होती हैं। पैर लाल- भूरे से लाल रंग के होते हैं। मादा फ्रैंकलीन नर काले तीतर के समान ही होते हैं, लेकिन, पीठ के निचले हिस्से पर व्यापक भूरे रंग के सलाखों के साथ, पीले होते हैं। गाल में सफेद धब्बे नहीं होते हैं, और भूरे गले के बदले ग्रीवापश्च में एक धब्बा पाया जाता है।

इनका मुख्य भोजन अनाज, घास के बीज, झाड़ियो के गिरे हुए फल, शिकार, कंद, दीमक, चींटियां और कीड़े मकोड़े हैं।


अंतिम नवीनीकृत  25/6/2013